प्रत्येक धार्मिक व्यक्ति अपने-अपने धर्म के अनुसार "सही" भगवान को पूज रहे हैं। हिंदू अपने-अपने देवी-देवताओं को, मुस्लिम अपने अल्लाह को, ईसाई अपने गोड को। फिर भी सभी धर्मों में कमोबेश अमीर लोग भी हैं, गरीब लोग भी, सुखी लोग भी सभी धर्मों में मिल जाएंगे और दुखी लोग भी, अच्छे लोग भी हैं, और अपराधी भी। सही भगवान की प्रार्थना करने का कुछ खास ईनाम मिलता दिखाई नहीं दे रहा है। दूसरी ओर गलत भगवान या झूठे भगवान की पूजा करने की सजा भी नहीं मिल रही। लगता है ये प्रार्थनाएं बेकार जा रही हैं! चीन, जापान, रूस, बेल्जियम, नीदरलैंड, नार्वे आदि देश बिना ईश्वर के तरक्की कर रहे हैं, वहीं भारत, पाकिस्तान, मलेशिया, इथोपिया जैसे धार्मिक देश गरीबी, अपराध, भ्रष्टाचार के दलदल में फँसे हुए हैं। पुजारी-वर्ग मृत्यु के बाद न्याय मिलने की बात कहकर पतली गली से निकल लेता है। वह स्वर्ग-नरक के किस्से सुनाकर छुटकारा पा लेता है। मृत्यु के बाद कोई जीवन है, इसके कोई भी प्रमाण नहीं मिले हैं, इस तरह परलोक की कहानियाँ, स्वर्ग के लालच और नरक के डरावने दृश्य पुजारी-श्रेणी की गढ़ी हुई शरारत-भर मालूम होती है। यह...