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अक्टूबर, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

जनसांख्यिकी आपकी नियति

 जनसांख्यिकी किसी देश या प्रदेश की नियति तय करती है। चीन आज अपनी एक बच्चे की नीति पर पछता रहा है। चीन जल्दी ही बूढ़ों का देश बन जाएगा। वहीं भारत लोकतांत्रिक ढंग से परिवार नियोजन को लागू करने का लाभ उठा रहा है। जिस जनसंख्या को हम भारत की सबसे बड़ी समस्या समझ रहे थे, वही आज हमारी सबसे बड़ी ताकत बन गई है।     लेकिन पंजाब के जनसांख्यिकी के आँकड़े चौकाने वाले हैं। खासकर सिक्खों के लिए चिंता को बढ़ाने वाले हैं। सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम के अनुसार पंजाब की जनसंख्या वृद्धि दर निरंतर घट रही है।  पंजाब की जनसंख्या वृद्धि दर 2020 में 1.65% रही, जबकि राष्ट्रीय दर 2.98% है। 2001 में भारत की कुल जनसंख्या में पंजाब का हिस्सा 2.37% था, जो अब 2.29% रह गया है।  पंजाब में 2011 में 5.11 लाख बच्चों ने जन्म लिया, लेकिन 2020 में सिर्फ 3.81 बच्चे पैदा हुए। जबकि पड़ोसी राज्य हरियाणा में, जो क्षेत्रफल में पंजाब से छोटा है, 5.91 लाख बच्चे हुए।  इसका प्रमुख कारण है पंजाब की युवा आबादी का कनाडा, अमेरिका, आस्ट्रेलिया आदि देशों में जाना। यह हालत तब है जबकि पंजाब में यूपी-बिहार से प्र...

अंधभक्तों की भीड़

 आज मैं शाम को सैर पर निकला तो दूर से भजन-कीर्तन की आवाज सुनाई दी। आज स्कूल से लौटते हुए मैंने आसाराम के भक्तों की, या साफ शब्दों में कहें तो अंधभक्तों का, एक बड़ा ट्राला देखा था, जिस पर बड़े-बड़े शब्दों में "आत्मसाक्षात्कार दिवस" लिखा हुआ था। इस भजन-कीर्तन में आसाराम के स्टाइल में "हरी ओम" की आवाज सुनकर मैं समझ गया कि यह उसी के भक्तों का कार्यक्रम है। मैंने तो सैर ही करनी थी, तो सोचा कि आज इन्हीं का निरीक्षण कर लिया जाए। मैं उनकी ओर बढ़ चला। सैक्टर 23 के सनातन धर्म मंदिर के सामने मैंने देखा कि वही बड़ा ट्राला सुंदर ढंग से सजाया हुआ था और आसाराम के कथित आत्मसाक्षात्कार दिवस को उसके भक्त धूमधाम से मना रहे थे। ट्राले पर बैठकर स्त्री-पुरूष उसके गुणगान के गीत गाए जा रहे थे। पीछे-पीछे लगभग 100-150 लोग पैदल चल रहे थे। उनके पीछे आठ-दस कारें चल रही थी, जिन पर आसाराम और रामचंद्र के चित्र रक्खे हुए थे। मुझसे इस संत-वेष में छिपे बदमाश का समारोह मनाते हुए इन अंधभक्तों पर काफी गुस्सा आया। मैं इन अक्ल के अंधों पर हैरान हो रहा था। एक बार सोचा कि एक-दो से पूछूं कि, "क्या भैया,...

देश-निंदा में आनंद

 (मेरे फेसबुक मित्र स्वप्न बिश्वास ने भारत के विश्व गुरू के दावे का मजाक उड़ान हुए पोस्ट की:- "एशियाई खेल में विषगुरु देश की स्थिति" इसके साथ पदक-सूची का चित्र था जिसके चीन 161 स्वर्ण पदक जीतकर पहले स्थान पर था। जबकि भारत 15 स्वर्ण पदकों के साथ चौथे स्थान पर था। इस पर मैंने उनको अपना कमेन्ट दिया। प्रस्तुत लेख इसी पर आधारित है) अभी तो भारत की खेलों में स्थिति काफी सुधरी है। इस बार भारत ने एशियाई खेलों में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया है। अभी तक 18 स्वर्ण पदक सहित कुल 81 पदक जीत चुका है। कुछ लोग चीन से तुलना करके भारत के "विश्व गुरू" होने पर ओछी टीका-टिप्पणी करने में लगे हुए हैं। चीन ने अभी तक 166 स्वर्ण पदक सहित कुल 304 पदक जीत लिए हैं। वह भारत से बहुत आगे हैं। लेकिन धीरे-धीरे भारत भी उभरती हुई खेल-शक्ति बन रहा है। यह ठीक है कि भारत अभी भी चीन, जापान, अमेरिका, रूस आदि देशों से बहुत पीछे हैं। अभी भारत को अपने प्रदर्शन में और सुधार करना होगा। लेकिन इसकी शुरुआत हो चुकी है। भारत ने पिछले एशियाई खेल से इस बार अधिक मैडल जीते हैं। 2018 में 15 स्वर्ण पदक सहित कुल 69 पदक जी...