चंद्रयान 3 के सफलतापूर्वक चाँद पर उतरने की खुशी तो हम सभी भारतीयों को है। लेकिन इससे कुछ लोगों का "विश्व गुरू" वाला बुखार जोर पकड़ने वाला है। गडरियों के गीतों में "विज्ञान-सूत्र" होने का दावा और गरज कर किया जाएगा। हुकूमत में बैठे लोग इसे अपने राजनीतिक हितों के लिए भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। जवाहरलाल नेहरू के योगदान को जान-बूझकर भुलाया जा रहा है। जबकि चंद्रयान 3 की सफलता में नरेंद्र मोदी जी के साथ-साथ सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की "स्थाई विज्ञान-समर्थक नीति" का योगदान है। सेकुलरिज्म नाममात्र का रह जाने का संकट और अधिक गहराने वाला है। भारत के "दूसरा पाकिस्तान" बन जाने का खतरा प्रत्यक्ष खतरा आ खड़ा है। विज्ञान की उपलब्धि का श्रेय बड़ी बेशर्मी से "ऋषि-परंपरा" को दिया जा रहा है। समुद्र लाँघने को पाप समझने वाले, सती प्रथा के नाम पर औरत को जिंदा जला देने वाले आज क्वांटम थ्योरी की बात कर रहे हैं। इसमें कुछ बिके हुए वैज्ञानिक और पत्रकार भी इनका साथ दे रहे हैं। वैज्ञानिकों की सफलता का श्रेय वैज्ञानिकों को ही दें। सावधान!