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अगस्त, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

विश्व गुरू का बुखार

 चंद्रयान 3 के सफलतापूर्वक चाँद पर उतरने की खुशी तो हम सभी भारतीयों को है। लेकिन इससे कुछ लोगों का "विश्व गुरू" वाला बुखार जोर पकड़ने वाला है। गडरियों के गीतों में "विज्ञान-सूत्र" होने का दावा और गरज कर किया जाएगा।  हुकूमत में बैठे लोग इसे अपने राजनीतिक हितों के लिए भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। जवाहरलाल नेहरू के योगदान को जान-बूझकर भुलाया जा रहा है। जबकि चंद्रयान 3 की सफलता में नरेंद्र मोदी जी के साथ-साथ सभी पूर्व प्रधानमंत्रियों की "स्थाई विज्ञान-समर्थक नीति" का योगदान है।       सेकुलरिज्म नाममात्र का रह जाने का संकट और अधिक गहराने वाला है। भारत के "दूसरा पाकिस्तान" बन जाने का खतरा प्रत्यक्ष खतरा आ खड़ा है।       विज्ञान की उपलब्धि का श्रेय बड़ी बेशर्मी से "ऋषि-परंपरा" को दिया जा रहा है। समुद्र लाँघने को पाप समझने वाले, सती प्रथा के नाम पर औरत को जिंदा जला देने वाले आज क्वांटम थ्योरी की बात कर रहे हैं। इसमें कुछ बिके हुए वैज्ञानिक और पत्रकार भी इनका साथ दे रहे हैं।  वैज्ञानिकों की सफलता का श्रेय वैज्ञानिकों को ही दें। सावधान!

वेदों में विज्ञान की गप्प

 ये हमारे वैज्ञानिक संस्थान 'इसरो' के प्रमुख हैं ! - नाम है एस. सोमनाथ। इनके अनुसार सारा विज्ञान अंग्रेजों ने हमारे वेदों से कापी मारा है।  अबे ओरिजनल इडियट ! विज्ञान की कमाई खाकर भी धर्म की जुगाली क्यों कर रहा है? संस्कृत अगर कंप्यूटर के लिए सबसे उपयुक्त है तो काहे नहीं बना लिया तुम्हारे ऋषि-मुनियों ने कंप्यूटर? अरे वैज्ञानिकों के नाम पर धब्बे ! हिंदुत्व वादियों के चमचे ! अपने निजी फायदे के लिए विज्ञान के क्षेत्र में पश्चिम के योगदान को क्यों नकार रहा है? तुम्हारे भौंकने से यह तथ्य बदलने वाला नहीं हैं कि रेल, जहाज, कंप्यूटर, बिजली, बल्ब, रेडियो, भाप इंजिन आदि ज्यादातर आविष्कार पश्चिम के ही नाम हैं। तुम्हें पश्चिम से क्या दिक्कत है? क्या वे लोग मनुष्य नहीं हैं? क्या वे किसी और ग्रह से आए हैं? क्या एडीसन का बल्ब सिर्फ उसके देश में रौशनी देता है? क्या एडवर्ड जेनर का चेचक का टीका सिर्फ उसके देश में ईलाज करता है? क्या गूगल, फेसबुक सिर्फ अमेरिका में चलता है? नहीं, एक आविष्कार पूरी मानवता को लाभ पहुँचाता है। इसलिए विज्ञान को, वैज्ञानिकों को पूर्व-पश्चिम के चश्मे से देखना छोड़ो। हमा...