आज के विज्ञान के युग में,जबकि विज्ञान के महत्त्व से सब सहमत हैं(कट्टर से कट्टर आस्तिक भी) तब फिर इस नए जीवन-सूत्र की क्या जरूरत है? बात इतनी भी सीधी नहीं है जी.....
निःसंदेह आज विज्ञान की ताकत सब स्वीकार करते हैं,फिर भी कुछ प्राणी हैं जिनकी पूंछ टेढ़ी ही रहेगी.येन केन प्रकारेण उन्हे अपनी दुकान चलानी है.विज्ञान द्वारा खोजे गए उपकरणों से ही अपने धंधे को नए कलेवर में प्रस्तुत कर रहे हैं.ऑनलाइन दर्शन,ईमेल, से लैस ये धूर्त भोली-भाली जनता को मूर्ख बना रहे हैं.ऐसे में भारत में भी मानववादी,सेकुलर जीवन-मूल्य स्थापित करने की जरूरत है,जिसके केंद्र में मानव और विज्ञान हो...
निःसंदेह आज विज्ञान की ताकत सब स्वीकार करते हैं,फिर भी कुछ प्राणी हैं जिनकी पूंछ टेढ़ी ही रहेगी.येन केन प्रकारेण उन्हे अपनी दुकान चलानी है.विज्ञान द्वारा खोजे गए उपकरणों से ही अपने धंधे को नए कलेवर में प्रस्तुत कर रहे हैं.ऑनलाइन दर्शन,ईमेल, से लैस ये धूर्त भोली-भाली जनता को मूर्ख बना रहे हैं.ऐसे में भारत में भी मानववादी,सेकुलर जीवन-मूल्य स्थापित करने की जरूरत है,जिसके केंद्र में मानव और विज्ञान हो...
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